सूचीअध्याय 3: स्थूल ब्रह्मांड (V5.05)

I. घटनाएँ और चुनौतियाँ


II. भौतिक तंत्र (ऊर्जा-सागर के तनाव पुनर्निर्माण)

मुख्य विचार: ब्रह्माण्ड “रिक्त ज्यामितीय डिब्बे” में नहीं, बल्कि ऐसी ऊर्जा-सागर (Energy Sea) में विकसित होता है जिसे घटनाएँ वास्तविक समय में पुनर्संरचित करती रहती हैं। इस सागर का तनाव स्थानीय प्रकाश-वेग की ऊपरी सीमा और उत्सर्जकों की भीतरी धड़कन—दोनों निर्धारित करता है। इसलिए देखी गई रेडशिफ्ट एकल स्रोत नहीं, बल्कि दो पदों का जोड़ है।

  1. स्रोत-कैलिब्रेशन: उत्सर्जन-स्थल का तनाव पैमाना तय करता है।
    उत्सर्जक की आन्तरिक गति स्थानीय तनाव से बनती है—तनाव अधिक हुआ तो “घड़ी” धीमी और स्वाभाविक आवृत्ति कम; तनाव कम हुआ तो उल्टा। परमाणु-घड़ियों की ऊँचाई-निर्भरता और गुरुत्वीय रेडशिफ्ट यही दिखाते हैं। यदि ब्रह्माण्ड के आरम्भिक काल में तनाव-कैलिब्रेशन अलग था तो “जन्म से थोड़ा लाल” और धीमी धड़कन—रेडशिफ्ट और समय-विस्तार का पहला स्रोत बनती है। यह उत्सर्जन-पक्ष का गुण है; प्रकाश का रास्ते में “खींचा जाना” आवश्यक नहीं। इसी से गहरे गुरुत्वीय कुओं या अत्यधिक सक्रिय परिवेश में समान मोमबत्तियाँ “धीमी” क्यों दिखती हैं, यह भी समझ आता है।
  2. मार्ग-विकास रेडशिफ्ट (PER) पहली बार; आगे केवल मार्ग-विकास रेडशिफ्ट।
    प्रकाश ऊर्जा-तंतु (Energy Threads) के सहारे ऊर्जा-सागर में बढ़ता हुआ एक तरंग-पुंज है। यदि मार्ग पर तनाव केवल स्थान में बदलता है, समय में नहीं, तो प्रवेश-निकास प्रभाव कट जाते हैं—शुद्ध आवृत्ति-परिवर्तन नहीं होता; बस यात्रा-समय और प्रतिमा बदलती है। परन्तु जब फोटॉन उस तनाव-भू-आकृति से गुजरता है जो उसके भीतर रहने के दौरान विकसित हो रही हो—जैसे कोई महा-विरल क्षेत्र “लौट” रहा हो या कुआँ उथला/गहरा हो रहा हो—तो प्रवेश-निकास असममित हो जाते हैं और लाल या नीले की ओर अक्रोमैटिक शुद्ध बदलाव बचता है। मार्ग-विकास रेडशिफ्ट का परिमाण इस पर निर्भर है कि फोटॉन बदलते क्षेत्र में कितनी देर ठहरा और परिवर्तन की दिशा-गति क्या रही; यह रंग पर निर्भर नहीं होता।
  3. यात्रा-समय का अंतर: तनाव “कितनी तेज़ जा सकते हैं” यह भी तय करता है।
    तनाव अधिक हुआ तो स्थानीय प्रसार-सीमा ऊँची; तनाव कम हुआ तो कम। अलग-अलग तनाव क्षेत्रों को पार करने पर कुल समय रास्ते पर निर्भर हो जाता है—सौर-मण्डल के “अतिरिक्त विलम्ब” और प्रबल गुरुत्वीय लेंस के “समय-विलम्ब” की तरह। अतः दिशाओं/परिवेशों के साथ यात्रा-समय और रेडशिफ्ट के संयोजन थोड़ा-थोड़ा बदलते हैं। यदि माध्यम-पदों को ज्यामितीय-पदों से अलग नहीं किया, तो माध्यम को ज्यामिति में मिला देंगे और प्रसार-दर के आकलनों में तंत्रगत अंतर पैदा होगा।
  4. कौन “सागर को फिर से तानता” है: तनाव पुनर्निर्माण।
    ब्रह्माण्ड ठहरा जल नहीं। निर्माण–विनाश, विलय और जेट जैसी ऊर्जावान घटनाएँ बड़े पैमाने पर सागर को बार-बार तानती हैं:
    • अन्दर की ओर समतल पूर्वाग्रह अनेक सामान्यीकृत अस्थिर कण (GUP) की अल्पजीवी खींच के स्थान-काल औसत से सांख्यिकीय तनावीय गुरुत्व (STG) में एकीकृत होकर धीरे-धीरे मार्गदर्शक भू-आकृति को गहरा करता है।
    • सूक्ष्म पृष्ठभूमि-बनावट कण-विनाश के दौरान प्रविष्ट व्यवधान-पुंजों से बनती है, जिसे तनावीय पृष्ठभूमि शोर (TBN) कहा जाता है; यह मार्गों और प्रतिमाओं में हल्का-सा “दाने” जोड़ती है।
      पहला आधार-भू-आकृति तय करता है; दूसरा सूक्ष्म-समायोजन देता है। मिलकर ये तनाव-मानचित्र को पुनर्गठित करते हैं और स्रोत-कैलिब्रेशन, यात्रा-समय तथा मार्ग-विकास रेडशिफ्ट—तीनों को प्रभावित करते हैं।

हिसाब-किताब:


III. दृष्टान्त

एक ही ढोलक-त्वचा को अलग-अलग तनाव पर सोचिए। जितनी कसी, प्राकृतिक ताल उतनी ऊँची और तरंगें तेज़; जितनी ढीली, उतनी मन्द। उत्सर्जक पहले ताल बाँध देता है (स्रोत-कैलिब्रेशन)। यदि प्रस्तुति के बीच कोई त्वचा की कसावट बदल दे, तो उस खण्ड में ताल और क़दम फिर बदल जाते हैं (मार्ग-विकास रेडशिफ्ट और यात्रा-समय का अंतर)।


IV. परम्परागत विवरणों से तुलना


V. निष्कर्ष


संक्षेप में, जब ये खाते अलग-अलग रखे जाते हैं, तो मुख्य रेडशिफ्ट–दूरी नियम अक्षुण्ण रहता है, और विधि-से-विधि तनाव तथा दिशा/परिवेश की सूक्ष्म भिन्नताओं को स्पष्ट भौतिक आधार मिल जाता है—यह माध्यम की आवाज़ है, न कि माप-त्रुटि।


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श्रेय (सुझाव): लेखक: 屠广林|कृति: “ऊर्जा फिलामेंट सिद्धांत”|स्रोत: energyfilament.org|लाइसेंस: CC BY 4.0
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संस्करण जानकारी: प्रथम प्रकाशन: 2025-11-11 | वर्तमान संस्करण: v6.0+5.05