सूची / अध्याय 4: ब्लैक होल (V5.05)
पाठक हेतु. यह खंड उन पाठकों के लिए है जिन्हें ब्लैक होल अवलोकन और निकट–क्षितिज भौतिकी का आधार मालूम है। हम दृश्य संकेतों को उनके कारण–तंत्र से मिलाते हैं और पहचान/सत्यापन के व्यावहारिक बिंदु देते हैं।
I. इमेज–प्लेन संकेत: मुख्य रिंग, उप–रिंगें और दीर्घजीवी उज्ज्वल सेक्टर
- मुख्य रिंग — क्रिटिकल बैंड के पास बहु–पथ लौटाव से शक्तिशाली संचयन
- लक्षण: केंद्रीय छाया के चारों ओर उज्ज्वल रिंग। युग–दर–युग रिंग का त्रिज्या लगभग स्थिर; मोटाई आज़िमुथ के साथ बदलती है।
- तंत्र: दृष्टि–रेखा जब तनन–कॉर्टेक्स से गुजरती है, प्रकाश क्रिटिकल बैंड के पास बार–बार मुड़ता है। लगभग स्पर्शी पथ, बहु–लौटाव और लंबी राहें ज्यामितीय रूप से जुड़ती हैं। उत्सर्जक क्षेत्र जैसे ही बैंड को छूता है, ऊर्जा रेखा–दृष्टि पर जमा होकर स्थिर रिंग बनती है। त्रिज्या औसत बैंड–स्थिति (स्थिर) को, मोटाई स्थानीय ढील और लौटाव–परतों की संख्या (अनैसर्गिक) को दर्शाती है।
- पहचान: क्रॉस–रिकंस्ट्रक्शन के बाद सरल रिंग–मॉडल फिट करें और त्रिज्या को रात/बैंड के पार मिलाएँ; क्लोज़र–फेज़ और क्लोज़र–एम्प्लिट्यूड से एरे–आर्टिफैक्ट हटाएँ।
- उप–रिंगें — लौटाव–क्रमों की गहरी शृंखला
- लक्षण: मुख्य रिंग के भीतर अधिक पतली और मंद समकेन्द्रीय रिंगें; उच्च डायनैमिक–रेंज चाहिए।
- तंत्र: कुछ किरणें बैंड के भीतर एक–दो अतिरिक्त लौटाव कर संकीर्ण ढील–खिड़कियों से बाहर निकलती हैं। अलग–अलग लौटाव–क्रम अलग पथ–लंबाई और निर्गमन–कोण देते हैं, जो भीतर–की ओर, पतली और मंद उप–रिंगों के रूप में दिखते हैं।
- पहचान: विज़िबिलिटी–कर्व में दूसरा उथला न्यूनतम खोजें; मुख्य रिंग मॉडल घटाकर शेष में धनात्मक रिंग देखें; बहुबैंड सह–स्थिति भरोसा बढ़ाती है।
- सावधानी: स्कैटरिंग–टेल और डी–कन्वोल्यूशन आर्टिफैक्ट हटाएँ; क्लोज़र–परिमाण और बहु–एल्गोरिद्म सामंजस्य पर टिकें।
- दीर्घजीवी उज्ज्वल सेक्टर — पट्टीनुमा उप–क्रिटिकल “नरम बिंदु”
- लक्षण: रिंग का एक सेक्टर लंबे समय तक अधिक चमकीला रहता है; स्थिति लगभग स्थिर, कंट्रास्ट मापनीय।
- तंत्र: उस आज़िमुथ में, ट्रांज़िशन–ज़ोन का कतरन सूक्ष्म तरंगों को संरेखित कर पट्टीनुमा उप–क्रिटिकल गलियारा बनाता है; कॉर्टेक्स वहाँ हल्का–सा अधिक ढीला पड़ता है। बाहर की प्रभावी रुकावट घटती है, इसलिए बहु–लौटाव ऊर्जा अधिक सहजता से निकलती है।
- पहचान: रातों/बैंडों के पार उसी आज़िमुथ पर वृद्धि; अक्सर पट्टी–आकार के ध्रुवण–संरचनाओं के साथ सह–स्थिति।
- सावधानी: आरंभिक मॉडल और uv–कवरेज बदलकर जाँचें कि सेक्टर “एल्गोरिद्म को नहीं फॉलो” कर रहा; कॉन्फ़िग बदलते ही आज़िमुथ भटके तो सावधानी रखें।
II. ध्रुवण पैटर्न: मुलायम मोड़ और पट्टी–आकार फ्लिप
- मुलायम मोड़ — कतरन–संरेखित ज्यामिति की प्रक्षेपिका
- लक्षण: EVPA रिंग के साथ–साथ निरंतर बदलता है; कई खंडों में लगभग एकरूप।
- तंत्र: ट्रांज़िशन–ज़ोन सूक्ष्म तरंगों को दिशा–युक्त पट्टियों में सीधा करता है। दिखाई देने वाला EVPA पट्टियों की उन्मुखता और स्थानीय प्रसरण–ज्यामिति से बनता है; आज़िमुथ बदलने पर प्रक्षेप बदलता है, इसलिए मोड़ मुलायम दिखता है।
- पहचान: रोटेशन–मेज़र का मानचित्र बनाएँ, अग्रभूमि फ़ैराडे–घूमाव हटाएँ; फिर रिंग पर समान–दूरी सैंपल लेकर EVPA–विरुद्ध–आज़िमुथ ग्राफ़ की चिकनाहट देखें।
- पट्टी–आकार फ्लिप — रिकनेक्शन–कॉरिडोर और उन्मुखता–उलट की संकीर्ण छाप
- लक्षण: एक/अधिक संकीर्ण पट्टी में EVPA तेज़ी से उलटता है और ध्रुवण–भिन्नांश घटता है; कुल–तीव्रता में अक्सर सह–स्थित पतली रेखा दिखती है।
- तंत्र: सक्रिय रिकनेक्शन–कॉरिडोर या तीखे कतरन–जंप में प्रमुख उन्मुखता छोटे पैमाने पर उलटती है, या एक ही दृष्टि–रेखा में विपरीत उन्मुख घटक जुड़ते हैं। नेट EVPA पलटता है और भिन्नांश घटता है।
- पहचान: पास–पास की बैंडों में स्थिति संगत; फ्लिप–पट्टी की चौड़ाई रिंग की चौड़ाई से स्पष्ट रूप से कम; दीर्घजीवी उज्ज्वल सेक्टर के किनारों या कतरन–गलियारों के साथ सह–स्थिति आम।
- सावधानी: बहुबैंड रैखिक–एक्सट्रपोलैशन से फ़ैराडे हटाएँ और टिकाव देखें; यंत्रजन्य ध्रुवण–लीकेज की जाँच करें।
III. समय–डोमेन की “आवाज़ें”: साझा सीढ़ी और प्रतिध्वनि–लिफ़ाफ़ा
- साझा सीढ़ी — पूरी क्रिटिकल रिंग का समकालिक गेटिंग
- लक्षण: डिस्पर्शन–सुधार और संरेखण के बाद, बहुबैंड प्रकाश–वक्र लगभग एक ही समय उछलते या मुड़ते हैं।
- तंत्र: एक प्रबल घटना तनन–कॉर्टेक्स को थोड़ा दबाती है और क्रिटिकल–थ्रेशहोल्ड को क्षणभर घटाती है। इसलिए लगभग सभी बैंडों में बहु–लौटाव ऊर्जा अधिक आसानी से निकलती है। यह ज्यामितीय गेटिंग है, प्रसरण–सम्बन्धी नहीं, इसलिए समय–मेल क्रॉस–बैंड वैध रहता है।
- पहचान: संरेखण के बाद अवशेष–सहसंबंध निकालें; शून्य–विलंब पर आवृत्ति–स्वतंत्र उभार अपेक्षित है। उसी समय–खिड़की की छवियों में उज्ज्वल सेक्टर प्रबल और फ्लिप–पट्टियाँ सक्रिय होती दिखनी चाहिए।
- सावधानी: पाइपलाइन–सिंक और कैलिब्रेशन–स्टेप के कारण बने झटकों को हटाएँ; एकल–बैंड संतृप्ति/क्लिपिंग का भ्रम न हो, यह जाँचें।
- प्रतिध्वनि–लिफ़ाफ़ा — पीछे हटने के बाद उछाल और बहु–रूटिंग
- लक्षण: प्रबल घटना के बाद घटती ऊँचाई के द्वितीय–शिखर दिखते हैं जिनकी दूरी क्रमशः बढ़ती है।
- तंत्र: ट्रांज़िशन–ज़ोन इनपुट को स्थानीय तनन–उठान के रूप में जमा करता है, फिर लॉट–लॉट छोड़ता है; इस दौरान ज्यामितीय लूप पथों को पुनः रूट करते हैं। पहला छोड़ना सबसे बड़ा होता है; आगे के छोड़े छोटे। पथ बढ़ने से अंतराल स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। यदि भीतर का उछाल साथ हो, दोनों लय जुड़कर लिफ़ाफ़ा चौड़ा करते हैं।
- पहचान: आत्म–सहसंबंध/वेवलेट से द्वितीय–शिखर खोजें; बहुबैंड चरण–मेल देखें; अंतराल–वृद्धि सभी बैंडों में संगत होनी चाहिए।
- सावधानी: दैनिक पृष्ठभूमि या uv–विंडो के साथ युग्मन जाँचें; आवर्त स्कैन या फ़ोकस–स्टेप से बने आर्टिफैक्ट हटाएँ।
IV. भेद और सत्यापन: न्यूनतम तीन कदम
- यंत्र और पुनर्निर्माण
- क्रॉस–रिकंस्ट्रक्शन: एल्गोरिद्म/आरंभिक–मॉडल बदलकर मुख्य रिंग, उप–रिंग और उज्ज्वल सेक्टर की स्थायित्व जाँचें।
- क्लोज़र–परिमाण: क्लोज़र–फेज़/एम्प्लिट्यूड से खगोलीय वास्तविकता सुनिश्चित करें।
- स्नैपशॉट इमेजिंग: तेज़ स्रोतों पर संयोजन–समय घटाएँ ताकि समय–वैरिएशन को स्थानिक बनावट न समझें।
- अग्रभूमि और माध्यम
- फ़ैराडे सुधार: रोटेशन–मेज़र का मानचित्र बनाकर अंतर्निहित EVPA पुनर्प्राप्त करें; फिर मोड़ और फ्लिप–पट्टियों का आकलन करें।
- प्रकीर्णन आकलन: आकार–विरुद्ध–आवृत्ति प्रवृत्ति मिलाएँ, स्कैटर–ब्लर व भ्रामक एक्सट्रपोलैशन हटाएँ।
- बहु–डोमेन संगति
- इमेज–पोलराइज़ेशन–समय: क्या साझा सीढ़ी, उज्ज्वल सेक्टर का उभार और फ्लिप–गतिविधि साथ–साथ दिखते हैं?
- बहु–स्टेशन/बहु–रात: क्या प्रमुख फ़िंगरप्रिंट अलग–अलग एरे–ज्यामिति और युगों में स्थिर रहते हैं?
V. संक्षेप में: एक ही कॉर्टेक्स, तीन भाषाएँ
- मुख्य रिंग और उप–रिंगें क्रिटिकल बैंड पर ज्यामितीय संचयन से बनती हैं; दीर्घजीवी उज्ज्वल सेक्टर पट्टीनुमा उप–क्रिटिकल “कमज़ोर स्थान” का चिह्न है।
- मुलायम मोड़ कतरन–संरेखण के बाद पट्टियों की उन्मुखता दर्ज करता है; पट्टी–आकार फ्लिप रिकनेक्शन–कॉरिडोर या उन्मुखता–उलट की संकीर्ण छाप है।
- साझा सीढ़ी और प्रतिध्वनि–लिफ़ाफ़ा, पूरे परिधि पर दबे और फिर उछले क्रिटिकल–थ्रेशहोल्ड का समय–पक्ष हैं।
इन तीन धागों को साथ रखकर हम जो देखते हैं उसे क्यों घटता है से सीधा जोड़ते हैं: वही तनन–कॉर्टेक्स इमेज–प्लेन पर रिंग और पट्टियाँ लिखता है, ध्रुवण में उन्मुखता, और समय–अक्ष पर गेटिंग व प्रतिध्वनि। यही मैप आगे आने वाले चैनल–तंत्र और ऊर्जा–वितरण के नियमों का आधार है।
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श्रेय (सुझाव): लेखक: 屠广林|कृति: “ऊर्जा फिलामेंट सिद्धांत”|स्रोत: energyfilament.org|लाइसेंस: CC BY 4.0
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संस्करण जानकारी: प्रथम प्रकाशन: 2025-11-11 | वर्तमान संस्करण: v6.0+5.05