सूचीअध्याय 1: ऊर्जा फ़िलामेंट सिद्धांत (V5.05)

“टेक्सचर” बताता है कि ऊर्जा-समुद्र में अभिमुखताएँ और अनिसोट्रॉपी कैसे व्यवस्थित होती हैं—कौन-सी दिशाएँ साथ-साथ पंक्तिबद्ध होती हैं, कहाँ वलयाकार परिसंचरण बनता है, और क्या कम-हानि वाले मार्ग उभरते हैं। टेक्सचर “कितना” (घनत्व) या “कितना तना” (तनाव) नहीं बताता; यह बताता है किस ढंग से व्यवस्था बनती है और किन दिशात्मक शृंखलाओं पर गति सबसे सुगम और स्थिर चलती है। प्रत्यक्ष रूप में यही वह रूप है जिसे हम सामान्यतः “क्षेत्र” कहते हैं: रेडियल झुकाव विद्युत-सदृश प्रभाव देता है, जबकि वलयाकार परिसंचरण चुंबकीय-सदृश प्रभाव देता है; दोनों अक्सर साथ दिखते हैं।


I. परतदार परिभाषा (तीन स्तर पर्याप्त)


II. घनत्व और तनाव के साथ कार्य-विभाजन (सबकी अपनी भूमिका)

चार सामान्य संयोजन:


III. यह क्यों महत्त्वपूर्ण है (चार ठोस प्रभाव)


IV. इसे कैसे देखा जाता है (मापयोग्य संकेत)


V. प्रमुख गुण (पाठक के लिए क्रियात्मक वर्णन)


VI. संक्षेप में (तीन मुख्य बातें)


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श्रेय (सुझाव): लेखक: 屠广林|कृति: “ऊर्जा फिलामेंट सिद्धांत”|स्रोत: energyfilament.org|लाइसेंस: CC BY 4.0
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संस्करण जानकारी: प्रथम प्रकाशन: 2025-11-11 | वर्तमान संस्करण: v6.0+5.05