सूची / अध्याय 3: स्थूल ब्रह्मांड (V5.05)
परिभाषाएँ और परंपराएँ: इस अनुभाग में बाहरी डिस्क में दिखने वाला “अतिरिक्त आकर्षण” सामान्यीकृत अस्थिर कण (GUP) के संयुक्त प्रभाव से समझाया गया है। अपने जीवनकाल में ये कण सांख्यिकीय टेन्सर गुरुत्व (STG) नाम का एक समतल, जोड़ात्मक झुकाव बनाते हैं, और विघटन/विनाशी होने पर टेन्सर स्थानीय शोर (TBN) नाम का निम्न-संगति, प्रसारित पृष्ठभूमि इंजेक्ट करते हैं। आगे पाठ में हम केवल हिन्दी के पूरे नामों का प्रयोग करेंगे और संक्षेपों का नहीं। EFT (Energy Filament Theory) के संदर्भ में परिवेशी माध्यम को ऊर्जा सागर (Energy Sea) कहा गया है।
I. घटनाएँ और केंद्रीय समस्या
कई सर्पिल आकाशगंगाएँ चमकीली डिस्क से बहुत बाहर तक उच्च और लगभग समतल घूर्णन वेग बनाए रखती हैं, जबकि वहाँ दृश्यमान पदार्थ विरल होता है, इसलिए वेग का त्रिज्या के साथ घटना अपेक्षित होता है। इसके साथ दो असाधारण रूप से सघन नियम मिलते हैं—
- दृश्यमान द्रव्यमान और बाहरी डिस्क का एक विशिष्ट वेग लगभग एक ही संबंध का अनुसरण करते हैं; विचलन बहुत कम रहता है।
- हर त्रिज्या पर कुल केन्द्रीयाभिमुख आकर्षण, दृश्यमान पदार्थ से उत्पन्न आकर्षण के लगभग एक-से-एक अनुरूप रहता है; यहाँ भी विचलन कम होता है।
वक्रों के रूप अलग-अलग दिखाई देते हैं—केन्द्र में कुस्प या कोर, पठार की त्रिज्या और ऊँचाई, तथा सूक्ष्म “बनावट”—जो परिवेश और घटनात्मक इतिहास पर निर्भर करते हैं। फिर भी उपर्युक्त दोनों नियम कसे रहते हैं, जो किसी साझा तंत्र की ओर संकेत करता है। पारंपरिक पद्धति प्रत्येक वस्तु में अदृश्य “घेर” जोड़कर फिट करती है, पर प्रायः वस्तु-विशेष समायोजन माँगती है और विविध निर्माण-इतिहास के बावजूद संबंध इतने सघन क्यों हैं, यह समझाने में कठिन पड़ती है।
मुख्य विचार: बाहरी डिस्क का अतिरिक्त आकर्षण, नए पदार्थ जोड़े बिना, माध्यम की सांख्यिकीय प्रतिक्रिया से उभर सकता है।
II. तंत्र का रेखाचित्र: एक टेन्सर परिदृश्य, तीन योगदान
- आधारभूत भीतरी ढाल (दृश्यमान पदार्थ)
तारे और गैस ऊर्जा सागर में भीतर की ओर ढला टेन्सर परिदृश्य तराशते हैं, जो मूल केन्द्रीयाभिमुख मार्गदर्शन देता है। यह योगदान त्रिज्या के साथ शीघ्र घटता है, इसलिए अकेला बाहरी पठार को नहीं थाम पाता।
प्रेक्षणीय संकेत: प्रकाश-से-द्रव्यमान अनुपात और गैस सतही घनत्व जितने अधिक केन्द्रित होंगे, भीतरी चढ़ाई उतनी “तेज़” होगी। - समतल जोड़ात्मक ढाल (सांख्यिकीय टेन्सर गुरुत्व)
सामान्यीकृत अस्थिर कण जीवनकाल में टेन्सर क्षेत्र पर सूक्ष्म आकर्षण अंकित करते हैं। ये स्थान-काल में जोड़कर एक समतल, स्थायी झुकाव बनाते हैं, जो त्रिज्या के साथ धीरे-धीरे ही घटता है।- स्थानिक समरूपता: झुकाव धीरे घटता है पर बाहरी डिस्क में प्रभावी बना रहता है, जिससे पठार टिकता है।
- गतिविधि-सहसमंजन: इसकी तीव्रता तारा-निर्माण दर, विलय/विघटन, गैस के आगमन-निर्गमन चक्र और बार/भुजाओं की शीयर के साथ बढ़ती है।
- स्व-लॉकिंग: आपूर्ति और घोल-मिश्रण बढ़ने पर गतिविधि बढ़ती है; झुकाव सशक्त होता है; बाहरी वेग-मानक “लॉक” हो जाता है।
प्रेक्षणीय संकेत: सतही SFR, बार की ताकत, गैस प्रवाह और विलय के चिह्न—इन सबका पठार की ऊँचाई/लंबाई से सहसंबंध।
- निम्न-आयाम बनावट (टेन्सर स्थानीय शोर)
विघटन/विनाशी के समय व्यापक बैंड के, निम्न-संगति वाले तरंग-पैकेट माध्यम में प्रविष्ट होते हैं और प्रसारित पृष्ठभूमि बनाते हैं। यह पृष्ठभूमि वेग प्रोफाइल में छोटे तरंग जोड़ती है व रेखाएँ चौड़ी करती है, पर औसत पठार-स्तर नहीं बदलती।
प्रेक्षणीय संकेत: रेडियो हैलो/रिलिक, कम-कॉन्ट्रास्ट प्रसारित संरचनाएँ और वेग-क्षेत्र में “दानेदारी”—ये सब विलय अक्षों और उच्च शीयर क्षेत्रों में उभरी हुई मिलती हैं।
त्रिज्यीय विभाजन (सहज दृष्टि):
- भीतर (R ≲ 2–3 R_d): मार्गदर्शन में दृश्यमान घटक प्रमुख; सांख्यिकीय टेन्सर गुरुत्व सूक्ष्म समंजन करता है—केंद्र कुस्प होगा या कोर, यह यहीं तय होता है।
- संक्रमण क्षेत्र: योगदान तुलनात्मक; वक्र ढलान से समतल में मुड़ता है; मुड़ने की त्रिज्या गतिविधि और इतिहास के साथ बदलती है।
- बाहरी पठार: सांख्यिकीय टेन्सर गुरुत्व का हिस्सा बढ़ता है—ऊँचा, विस्तृत पठार हल्की बनावट के साथ।
निष्कर्ष: बाहरी पठार ≈ दृश्यमान मार्गदर्शन + सांख्यिकीय टेन्सर गुरुत्व; बाहरी सूक्ष्म तरंगें ≈ टेन्सर स्थानीय शोर।
III. “दो सघन संबंध” क्यों बनते हैं
- द्रव्यमान–वेग: लगभग एक-ही रेखा
दृश्यमान पदार्थ माध्यम को आपूर्ति देता है और “घोलता-मिलाता” है, जिससे सामान्यीकृत अस्थिर कणों की कुल गतिविधि तय होती है; यही गतिविधि पठार का वेग-मानक निर्धारित करती है। इसलिए दृश्यमान द्रव्यमान और बाहरी वेग समान कारण से साथ-साथ बदलते हैं और विचलन कम रहता है। - कुल आकर्षण बनाम दृश्यमान आकर्षण: त्रिज्या के साथ लगभग एक-से-एक
कुल केन्द्रीयाभिमुख आकर्षण = दृश्यमान मार्गदर्शन + सांख्यिकीय टेन्सर गुरुत्व की समतल जोड़ात्मक ढाल। भीतर दृश्यमान घटक प्रभावी होता है; बाहर जोड़ात्मक ढाल का हिस्सा बढ़ता है। इस प्रकार हर त्रिज्या पर दृश्यमान आकर्षण का कुल आकर्षण से सुव्यवस्थित मानचित्रण मिलता है।
सीधा परीक्षण: नियत त्रिज्या पर गतिशील अवशेषों को गैस/धूल की शीयर और प्रसारित रेडियो-तीव्रता के साथ मानचित्रित करें—संबंध समान दिशा का होना चाहिए।
मुख्य विचार: दोनों संबंध एक ही टेन्सर परिदृश्य के अलग-अलग प्रक्षेप हैं—“द्रव्यमान बनाम वेग” और “त्रिज्या बनाम आकर्षण”
IV. कुस्पी और कोर-नुमा केंद्र साथ-साथ क्यों मिलते हैं
- समतलीकरण (घिसाई) तंत्र: दीर्घकालीन गतिविधि—विलय, विस्फोटक तारा-निर्माण, प्रबल शीयर—स्थानीय टेन्सर परिदृश्य को नरम करती है और भीतरी ढाल घटाती है; परिणामस्वरूप कोर बनता है।
- तनाव-वर्धन तंत्र: गहरे गुरुत्व-कुएँ, स्थिर आपूर्ति और मध्यम व्यवधान की स्थिति में कुस्पी रूप लौट आता है या बना रहता है।
निष्कर्ष: “कुस्पी” और “कोर” एक ही टेन्सर नेटवर्क की भिन्न परिस्थितियों/इतिहासों में प्रकट दो चरम अवस्थाएँ हैं।
V. बहु-बैंड प्रेक्षणों को एक ही टेन्सर-मानचित्र पर रखना (कार्यान्वयन)
सह-मानचित्रित करें:
- घूर्णन वक्र के पठार की ऊँचाई और त्रिज्यीय लंबाई।
- कमज़ोर/मज़बूत लेंसिंग की अभिसरण समोच्च रेखाएँ—कप्पा (κ)—का खिंचाव और केंद्र-विस्थापन।
- गैस वेग-क्षेत्र में शीयर-धारियाँ और अ-गॉसियन पूँछें।
- रेडियो हैलो/रिलिक की प्रसारित तीव्रता और उन्मुखीकरण।
- दीर्घकालीन शीयर के संकेतक के रूप में ध्रुवीकरण/चुम्बकीय-क्षेत्र रेखाओं की दिशा।
सह-मानचित्रण के मानदंड:
- स्थानिक सामंजस्य: उपर्युक्त पैटर्न विलय अक्षों, बार-अक्षों और सर्पिल-भुजाओं की स्पर्शरेखाओं के साथ सह-स्थित व सह-उन्मुख पाए जाएँ।
- काल-संगति: सक्रिय चरण में पहले प्रसारित पृष्ठभूमि (टेन्सर स्थानीय शोर) बढ़ेगी; उसके बाद दसियों–सैकड़ों मिलियन वर्ष में पठार गहरा/लंबा होगा (सांख्यिकीय टेन्सर गुरुत्व)। शांत चरण में क्रम उल्टा होगा।
- बैंड-पार साम्य: माध्यमजनित विकिरण-विस्तार के बाद, पठार और अवशेषों की दिशाएँ अलग-अलग बैंडों में मिलनी चाहिए, क्योंकि दिशा-निर्धारण वही टेन्सर परिदृश्य करता है।
VI. जाँचने योग्य भविष्यवाणियाँ (अवलोकन व फिटिंग के लिए संचालन)
- P1 | पहले शोर, फिर उत्थान (कालिक क्रम)
भविष्यवाणी: तारा-विस्फोट/विलय के बाद प्रसारित रेडियो-पृष्ठभूमि पहले बढ़ेगी (टेन्सर स्थानीय शोर)। दसियों–सैकड़ों मिलियन वर्ष में पठार की ऊँचाई व त्रिज्या बढ़ेंगी (सांख्यिकीय टेन्सर गुरुत्व सशक्त होगा)।
रणनीति: बहु-युग और बहु-वलय संयुक्त-फिट से पृष्ठभूमि-वृद्धि और पठार के गहराने/फैलने के बीच विलंब मापें। - P2 | परिवेश-निर्भरता (स्थानिक प्रतिरूप)
भविष्यवाणी: उच्च शीयर दिशाओं और विलय अक्षों के साथ पठार अधिक लंबा और ऊँचा होगा; वेग-क्षेत्र में दानेदारी अधिक प्रबल होगी।
रणनीति: बार/विलय अक्षों के अनुदिश सेक्टोरियल वक्र व प्रसारित-प्रोफाइल निकालकर तुलना करें। - P3 | एक-ही मानचित्र पर पार-पुष्टियाँ (बहु-मोडल)
भविष्यवाणी: κ-समोच्चों की दीर्घ-अक्ष, वेग-शीयर के शिखर, रेडियो-धारियाँ और प्रमुख ध्रुवीकरण-दिशाएँ आपस में सुसंगत होंगी।
रणनीति: चारों मानचित्र एक ही निर्देशांक तंत्र में दर्ज कर कोसाइन समानता की गणना करें। - P4 | बाहरी डिस्क का स्पेक्ट्रल रूप
भविष्यवाणी: बाहरी क्षेत्र के वेग-अवशेषों का पावर-स्पेक्ट्रम मध्यम–निम्न आवृत्तियों पर कोमल ढलान दिखाएगा—यह टेन्सर स्थानीय शोर की व्यापक-बैंड, निम्न-संगति प्रकृति से मेल खाता है।
रणनीति: अवशेष-स्पेक्ट्रम के शिखर और ढलान की तुलना प्रसारित रेडियो-पृष्ठभूमि से करें। - P5 | फिटिंग क्रम (परिमित पैरामीटर)
चरण:- फोटометрि और गैस से दृश्यमान पदार्थजनित आधारभूत भीतरी ढाल पर prior रखें।
- SFR, विलय-सूचक, बार-ताकत और शीयर से सांख्यिकीय टेन्सर गुरुत्व की आयाम/मापनी पर prior रखें।
- प्रसारित रेडियो की तीव्रता/बनावट से टेन्सर स्थानीय शोर द्वारा होने वाले विस्तार पर prior रखें।
- कम साझा पैरामीटरों से पूरी घूर्णन-वक्र फिट करें और लेंसिंग व वेग-क्षेत्र के सह-मानचित्रण से सत्यापित करें।
लक्ष्य: वस्तु-दर-वस्तु “घेर” समायोजन के बजाय एक ही पैरामीटर-सेट से बहु-डेटा मोड का समंजन।
VII. सहज उपमा
पीछे से आती हवा के साथ एक काफ़िला। इंजन दृश्यमान मार्गदर्शन का रूपक हैं। पीछे से आने वाली हवा सांख्यिकीय टेन्सर गुरुत्व का रूपक है—दूरी के साथ धीरे घटती है पर वेग थामे रखती है। सड़क की छोटी उभारें टेन्सर स्थानीय शोर का रूपक हैं—ये वेग-वक्र में हल्की दानेदारी जोड़ती हैं। प्रबंधन में शामिल है: गैस/आपूर्ति, “सड़क-स्थिति” (शीयर/गतिविधि) और पीछे-की-हवा की स्थायित्व (समतल जोड़ात्मक ढाल का आयाम)।
VIII. पारंपरिक व्याख्याओं से संबंध
- भिन्न व्याख्यात्मक राह: “अतिरिक्त आकर्षण” को अदृश्य पदार्थ से जोड़ने के बजाय, इसे माध्यम की सांख्यिकीय प्रतिक्रिया मानते हैं—सांख्यिकीय टेन्सर गुरुत्व की समतल जोड़ात्मक ढाल + टेन्सर स्थानीय शोर की निम्न-आयाम बनावट।
- कम स्वतन्त्रता-डिग्रियाँ: तीन सह-उत्पत्तिजन्य चालक—दृश्यमान आपूर्ति, दीर्घकालीन घोल-मिश्रण और परिणामी टेन्सर-झुकाव—परिणाम तय करते हैं और वस्तु-विशेष ट्यूनिंग घटाते हैं।
- एक मानचित्र, कई प्रक्षेप: घूर्णन वक्र, लेंसिंग, गैस-गतिशास्त्र और ध्रुवीकरण—एक ही टेन्सर परिदृश्य के भिन्न प्रक्षेप हैं।
- समावेशी, टकरावहीन दृष्टि: भविष्य में कोई नई घटक मिले तो उसे सूक्ष्म स्रोत माना जा सकता है; घूर्णन वक्र की प्रमुख विशेषताओं के लिए माध्यम के सांख्यिकीय प्रभाव पहले से पर्याप्त हैं।
IX. निष्कर्ष
एक ही टेन्सर परिदृश्य बाहरी समतल पठार, दो सघन संबंध, कुस्पी-और-कोर केंद्रों का सह-अस्तित्व तथा सूक्ष्म बनावट-भेद—इन सबको एक साथ समझाता है।
- दृश्यमान पदार्थ आधारभूत भीतरी ढाल गढ़ता है।
- सांख्यिकीय टेन्सर गुरुत्व उसके ऊपर एक समतल, दीर्घजीवी, धीमे-धीमे घटने वाली जोड़ात्मक ढाल रखता है—बाहरी वेग थामता है और वेग-मानक को दृश्यमान द्रव्यमान से जोड़ता है।
- टेन्सर स्थानीय शोर निम्न-आयाम दानेदारी जोड़ता है, समग्र पठार को बदले बिना।
संक्षेप में: प्रश्न “कितना अदृश्य पदार्थ जोड़ें?” से हटकर “एक ही टेन्सर परिदृश्य लगातार कैसे रूपान्तरित होता रहता है?” हो जाता है। इस माध्यम-आधारित, एकीकृत तंत्र में पठार, सघन संबंध, केन्द्रीय आकृतियाँ और परिवेश-निर्भरता—ये सब एक ही भौतिक प्रक्रिया के अलग-अलग रूप हैं, अलग पहेलियाँ नहीं।
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श्रेय (सुझाव): लेखक: 屠广林|कृति: “ऊर्जा फिलामेंट सिद्धांत”|स्रोत: energyfilament.org|लाइसेंस: CC BY 4.0
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संस्करण जानकारी: प्रथम प्रकाशन: 2025-11-11 | वर्तमान संस्करण: v6.0+5.05