सूचीअध्याय 4: ब्लैक होल (V5.05)

ब्लैक होल जितना छोटा होता है, क्षितिज के पास प्रतिक्रिया उतनी ही तेज़ और तीखी दिखती है; जितना बड़ा, उतनी धीमी और समतल रहती है। यह सतही भ्रम नहीं है। पैमाना बदलते ही बाहरी आलोचक सीमा, संक्रमण क्षेत्र और कोर अपने समय-मान, गतिशीलता, मोटाई और प्रवाह-वितरण का ढंग बदलते हैं।


I. प्रतिक्रिया का समय-मान: छोटे में छोटा, बड़े में बड़ा

क्षितिज के पास की प्रतिक्रिया “त्वचा” और संक्रमण क्षेत्र के भीतर ऊर्जा समुद्र (Energy Sea) में रिले की तरह चलती है। स्थानीय तनाव प्रसार की अधिकतम गति तय करता है, जबकि तय होने वाली दूरी सिस्टम के आकार के साथ बढ़ती है। इसलिए छोटे सिस्टम में छोटी पटरियाँ जल्दी पूरी होती हैं, बड़े सिस्टम में लंबी पटरियाँ धीमी पड़ती हैं।


II. “त्वचा” की गतिशीलता: छोटे में “हल्की”, बड़े में “भारी”

गतिशीलता बताती है कि समान उत्तेजना पर बाहरी आलोचक सीमा कितनी पीछे हटती है।

  1. क्यों बदलती है: छोटे पैमाने पर आलोचक पट्टी का एक छोटा टुकड़ा तुलनात्मक रूप से कम “तनाव बजट” रखता है। मामूली स्थानीय उत्थान या ज्यामितीय फेरबदल कुछ क्षणों के लिए न्यूनतम बाहरी गति को स्थानीय छत से नीचे ला सकता है, और सीमा आसानी से हिलती है। बड़े पैमाने पर वही उत्तेजना बड़े क्षेत्र और गहरे पृष्ठभूमि में फैल जाती है, इसलिए सीमा हिलने से कतराती है।
  2. रूपों में प्रदर्शन:
    • छोटा: क्षणिक “छिद्र” जल्दी जगमगाते हैं; अक्षीय छेदन आसानी से जुड़ जाता है; आलोचक पट्टी “पतली ढोलक-चमड़ी” जैसी लगती है।
    • बड़ा: समग्र परत स्थिर रहती है; पीछे हटाने के लिए ऊर्जा और दिशात्मक पक्षपात का संचय चाहिए—“मोटी ढोलक-चमड़ी” जैसा व्यवहार।

III. संक्रमण क्षेत्र की मोटाई: छोटे में पतली और संवेदनशील, बड़े में मोटी और बफ़र

सामग्री-दृष्टि से संक्रमण क्षेत्र दबाव को सँभालने, रखने और छोड़ने वाली “पिस्टन” परत है। पैमाना बढ़ते ही ज्यामितीय आकार और तनाव-भंडार बढ़ते हैं और परत स्वाभाविक रूप से मोटी बनती है; पैमाना घटते ही बफ़र पतला होता है।


IV. हिस्सेदारी का झुकाव: न्यूनतम प्रतिरोध वाली राह को सबसे बड़ा हिस्सा

बाहर जाने वाला फ्लक्स तीन राहों—क्षणिक छिद्र, अक्षीय छेदन और किनारे की पट्टी-जैसी उप-आलोचकता—में “न्यूनतम प्रतिरोध” के नियम से बँटता है। पैमाना बदलते ही इन राहों का आपसी प्रतिरोध व्यवस्थित रूप से बदलता है।

  1. छोटा:
    • छेदन-दहलीज़ कम: अक्षीय पक्षपात छिद्रों की कड़ी को आसानी से जोड़ देता है, जेट ज़्यादा कड़ा और सीधा बनता है।
    • छिद्र-घनत्व अधिक: “त्वचा” जल्दी पुनर्लिखित होती है; छिद्र-समूह आम हैं; मुलायम लीक-बेस आता-जाता रहता है।
    • किनारी पट्टियाँ कमजोर: धारियाँ मौजूद हैं पर दूर तक संरेखित रहना कठिन है; व्यापक री-प्रोसेसिंग का हिस्सा तुलनात्मक रूप से कम है।
  2. बड़ा:
    • किनारी पट्टियों का वर्चस्व: कतरन-संरेखण लंबा होता है; पट्टी-जैसी उप-आलोचकता स्थिर रहती है, व्यापक कोण वाले आउटफ़्लो और री-प्रोसेसिंग मज़बूत होते हैं।
    • छेदन अधिक चुजी: टिकाऊ अक्षीय चैनल के लिए दीर्घकालीन सप्लाई और उन्मुखीकरण की संगति चाहिए।
    • छिद्र विरल पर बड़े: एकल छिद्र अधिक देर जीते हैं पर कम दिखाई देते हैं और अक्सर घटनाओं से प्रेरित होते हैं।

V. त्वरित अवलोकन-मार्गदर्शिका: छोटे में “तेज़”, बड़े में “स्थिर”

ये अंतर परस्पर बहिष्कृत नहीं हैं। तीनों राहें अक्सर साथ रहती हैं; पैमाना बस नेतृत्व किसे मिले, यह तय करता है।


VI. संक्षेप में

द्रव्यमान बदलते ही क्षितिज-निकट “सामग्री-विज्ञान” बदल जाता है। छोटी रिले, हल्की त्वचा और पतला संक्रमण छोटे ब्लैक होल को तेज़, तीखा और छेदन-अनुकूल बनाते हैं। लंबी पटरियाँ, भारी त्वचा और मोटा संक्रमण बड़े ब्लैक होल को स्थिर, समतल और किनारा-प्रिय बनाते हैं। इस नज़र से “जेट-प्रिय” और “डिस्क-विंड-प्रिय” स्रोतों का अंतर संरचनात्मक कारण पाता है।


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श्रेय (सुझाव): लेखक: 屠广林|कृति: “ऊर्जा फिलामेंट सिद्धांत”|स्रोत: energyfilament.org|लाइसेंस: CC BY 4.0
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संस्करण जानकारी: प्रथम प्रकाशन: 2025-11-11 | वर्तमान संस्करण: v6.0+5.05