सूचीअध्याय 4: ब्लैक होल (V5.05)

इस अनुभाग में 4.1–4.9 की “सामग्री-परत” अवधारणा को क्रियाशील साक्ष्यों में बदला गया है। पहली आधी में सत्यापन प्रयोगों की रूपरेखा है; दूसरी आधी में स्पष्ट, खण्डनीय भविष्यवाणियाँ हैं। पढ़ने के बाद आप जानेंगे—किस बैंड पर, किन साधनों से और किन मात्राओं पर नज़र रखनी है—ताकि गतिशील आलोचक पट्टी, संक्रमण क्षेत्र और तीन निकास-मार्गों को पुष्ट या अस्वीकार किया जा सके।


I. सत्यापन का रोडमैप: तीन मुख्य लाइनें, दो सहायक

संभव हो तो इन पाँचों लाइनों को एक ही घटना-खिड़की में संरेखित करें। निर्णय-नियम: कोई एक लाइन पर्याप्त नहीं; कम से कम तीन का सामंजस्य आवश्यक है।


II. परीक्षण 1: क्या सच-मुच गतिशील आलोचक पट्टी मौजूद है

क्या देखें: लगभग स्थिर वलय-व्यास; आज़िमुथ के साथ बदलती वलय-मोटाई; मुख्य वलय के भीतर उप-वलयों का परिवार—और उनकी रात-दर-रात पुनरावृत्ति; तथा घटनाओं के दौरान वलय-मोटाई और उजाले का “साँस” जैसा छोटे-परंतु-संगत, समान-चरण परिवर्तन।

क्यों अस्वीकार कर सकता है: यदि वलय दीर्घावधि में एक परिपूर्ण रेखा जैसा बर्ताव करे—न उप-संरचनाएँ बनें, न घटनाओं से जुड़ा आगे-पीछे होना—तो “साँस लेने वाली” परत का दावा टिकता नहीं। उलटे, स्थिर मुख्य वलय + पुनरुत्पाद्य उप-वलय + कम-आमplitude वाला साँस—यह तीनों मिलकर बताते हैं कि “त्वचा” चिकनी सतह नहीं है।

न्यूनतम सेटअप: उच्च-आवृत्ति VLBI (उदा., 230 व 345 GHz एकसाथ) के साथ डायनेमिक इमेजिंग; वलय-मॉडल घटाकर अवशेषों में स्थिर उप-वलय खोजें; घटना-पूर्व/पश्चात वलय-मोटाई–उजाले की सहभिन्नता मापें।


III. परीक्षण 2: क्या संक्रमण क्षेत्र “पिस्टन-परत” की तरह काम करता है

क्या देखें: शक्तिशाली घटनाओं के बाद डी-डिस्पर्सन करने पर लगभग साथ-साथ उठने वाले कॉमन स्टेप; फिर इको-एनवेलप जिसमें द्वितीयक चोटियाँ घटती जाएँ और चोटियों की दूरी बढ़े; तथा सह-खिड़की इमेज-ध्रुवण—उजले सेक्टर का बढ़ना और पट्टी-आधारित फ़्लिप अधिक सक्रिय होना।

क्यों अस्वीकार कर सकता है: यदि स्टेप शुद्ध-दिस्पर्सन के अनुसार अलग-अलग हो जाएँ, या इको की अम्प्लीट्यूड/अन्तराल संगत क्रम न दिखाएँ, और इमेज-ध्रुवण में सह-खिड़की बदलाव न हों, तो दूरस्थ माध्यम/यंत्र-प्रभाव अधिक संभावित है। इस रूपरेखा में ज्यामितीय समकालिकता (सीमा दबते ही) और पिस्टन जैसी चरणबद्ध रिलीज़—दोनों अनिवार्य हैं।

न्यूनतम सेटअप: रेडियो से X-रे तक उच्च-काडेन्स फोटометрि को एकीकृत, डी-डिस्पर्स्ड टाइम-एक्सिस पर रखना; स्टेप–उजला सेक्टर–पट्टी-फ़्लिप त्रिक का परीक्षण करने हेतु समसामयिक इमेज-ध्रुवण स्लाइस लेना।


IV. परीक्षण 3: तीन निकास-मार्गों के पृथक फ़िंगरप्रिंट

  1. क्षणिक छिद्र (धीमा रिसाव)
    • इमेज: स्थानीय/समग्र मुलायम उजाला; भीतर के बारीक उप-वलय क्षण भर अधिक स्पष्ट।
    • ध्रुवण: उजले भाग में डिग्री थोड़ा घटती; कोण का कोमल मरोड़ जारी रहता है।
    • समय: छोटे कॉमन स्टेप और धीमा-कमज़ोर इको।
    • स्पेक्ट्रम: नरम/मोटे घटक ऊपर जाते हैं; कठोर स्पाइक्स नहीं।
    • मल्टी-मेसेन्जर: न्यूट्रिनो अपेक्षित नहीं।
      नियम: चार लाइनों का सामंजस्य ⇒ छिद्र-समूह प्रमुख
  2. अक्षीय छेदन (जेट)
    • इमेज: कोलिमेटेड जेट; बाहर की ओर जाते नोड; प्रति-जेट कमजोर।
    • ध्रुवण: उच्च डिग्री; खंड-दर-खंड स्थिर कोण; अनुप्रस्थ फ़ैराडे-रोटेशन ग्रेडिएंट।
    • समय: तेज़-कठोर फ्लेयर्स; जेट के साथ आगे बढ़ते छोटे स्टेप।
    • स्पेक्ट्रम: गैर-ऊष्मीय पावर-लॉ, ऊर्जावान छोर मजबूत।
    • मल्टी-मेसेन्जर: न्यूट्रिनो-सहसम्बन्ध संभव।
      नियम: पाँच में बहुमत ⇒ छेदन प्रमुख
  3. किनारी पट्टी-उप-आलोचकता (विस्तृत री-प्रोसेस/आउटफ़्लो)
    • इमेज: वलय-किनारे पर पट्टीदार उजाला; चौड़े कोण का बहिर्प्रवाह और धुंधला आभा।
    • ध्रुवण: मध्यम डिग्री; पट्टी के भीतर खंडित कोण-बदलाव; पट्टी के साथ-साथ फ़्लिप।
    • समय: धीमी उठान-गिरावट; रंग-आश्रित विलम्ब।
    • स्पेक्ट्रम: परावर्तन और नीला-अवशोषण प्रबल; IR और sub-mm मोटे।
    • मल्टी-मेसेन्जर: मूलतः विद्युतचुम्बकीय।
      नियम: चार लाइनों का सामंजस्य ⇒ किनारी पट्टी प्रमुख

V. पैमाने की क्रॉस-जाँच: “छोटा तेज़, बड़ा स्थिर” क्या सर्वत्र सत्य है

क्या देखें: अल्प-द्रव्यमान स्रोतों में मिनट–घंटे की झिलमिलाहट अधिक और जेट-छेदन आसान; उच्च-द्रव्यमान स्रोतों में दिन–माह का उतार-चढ़ाव प्रधान और किनारी पट्टियाँ अधिक दीर्घजीवी।

कैसे करें: वही पद्धति माइक्रोक्वासर और अतिद्रव्यमान ब्लैक होल—दोनों पर लागू करें। यदि समय-मान और प्रवाह-वितरण द्रव्यमान के साथ क्रमबद्ध खिसकें, तो “सामग्री-परत” पैरामीटर सक्रिय हैं।


VI. खण्डन-सूची: इनमें से कोई एक भी सिद्ध हुआ तो ढाँचे का बड़ा भाग निष्प्रभावी


VII. भविष्यवाणी-सूची: अगली दो-तीन पीढ़ियों में दिखने योग्य दस संकेत

ये सभी संकेत स्वतंत्र रूप से जाँचे जा सकते हैं। इनमें से कोई एक भी व्यवस्थित रूप से खण्डित होता है तो यांत्रिक-स्तर पर रूपरेखा की पुनर्समीक्षा आवश्यक होगी।


कॉपीराइट और लाइसेंस: जब तक अलग से न बताया जाए, “ऊर्जा फिलामेंट सिद्धांत” (पाठ, चार्ट, चित्र, प्रतीक और सूत्र सहित) का कॉपीराइट लेखक (屠广林) के पास है।
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श्रेय (सुझाव): लेखक: 屠广林|कृति: “ऊर्जा फिलामेंट सिद्धांत”|स्रोत: energyfilament.org|लाइसेंस: CC BY 4.0
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संस्करण जानकारी: प्रथम प्रकाशन: 2025-11-11 | वर्तमान संस्करण: v6.0+5.05