सूचीअध्याय 6: क्वांटम क्षेत्र (V5.05)

एकीकृत ढांचा: संग्रहित करें → पैकेट बनाएं → उत्सर्जित करें
हर प्रकाश उत्सर्जन को तीन चरणों में समझा सकते हैं।


संक्षेप में: निर्माण-दहलीज़ बताती है कैसे छोड़ा; पथ-दहलीज़ बताती है कितना दूर गया; क्लोज़र-दहलीज़ बताती है कैसे ग्रहण हुआ। यह दहलीज़-श्रृंखला तरंग-प्रसार और “हिस्सों की बही-खाता” को एक साथ बाँधती है।


“स्वस्फूर्त” क्यों होता है


प्रकाश की मुख्य “उत्पत्ति-शैलियाँ” (भौतिक कारण के अनुसार)
सबमें भंडार → निर्माण → उत्सर्जन समान रहता है; अंतर केवल भंडार कैसे बना, दहलीज़ कैसे पार हुई, और कौन-सा चैनल चुना गया में है।

  1. रेखीय उत्सर्जन (परमाणु/अणु स्तर-गिरावट)
    • भंडार: इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ऊपर उठा (उत्तेजन, आयनीकरण के बाद पकड़)।
    • निर्माण: फेज़ उत्सर्ज्य-क्षेत्र में; शोर धक्का देता है; संगत पैकेट बनता है; आवृत्ति आंतरिक ताल पर लॉक।
    • उत्सर्जन: लगभग समदिश; रेखा-चौड़ाई जीवनकाल (कम = चौड़ी) और परिवेश-डेकोहेरेंस (टक्कर, क्षेत्र-खुरदरापन) से तय।
    • विलंबित प्रकाश (फ्लोरेसेंस/फॉस्फोरेंस): मेटास्टेबल फँसाव द्वार देर तक बंद रखता है; विलंब/चैनल-प प्रतिस्पर्धा दिखती है।
  2. ऊष्मीय विकिरण (काला/अर्ध-काला पिंड)
    • भंडार: सतह-क्षेत्र में असंख्य सूक्ष्म प्रक्रियाएँ ऊर्जा का आदान-प्रदान करती हैं।
    • निर्माण: अनगिनत छोटे पैकेट ऊबड़-खाबड़ सीमाओं पर बार-बार संसाधित होकर सांख्यिकीय रूप से “श्याम” हो जाते हैं।
    • उत्सर्जन: स्पेक्ट्रम तापमान से; दिशा लगभग समदिश; कोहेरेंस कम; उत्सर्जकता/ध्रुवण सतह-तनाव/खुरदरापन से प्रभावित।
  3. त्वरित आवेश (सिंक्रोट्रॉन/वक्रता, ब्रेम्सस्ट्रालुंग)
    • सिंक्रोट्रॉन/वक्रता: मुड़ती कक्षाओं में आवेश लगातार पैकेट बनाकर छोड़ते हैं—उच्च दिशाभाव, मजबूत ध्रुवण, व्यापक पट्टी।
    • ब्रेम्सस्ट्रालुंग: प्रबल कुलॉम्ब क्षेत्र में तीव्र मंदन स्थानीय तनाव-नक्शा अचानक लिख देता है और व्यापक-पट्टी पैकेट फेंकता है; घने/उच्च-Z माध्यमों में प्रबल।
  4. पुनर्संयोजन (मुक्त इलेक्ट्रॉन पकड़ा गया)
    • भंडार: आयनिक “जेब” इलेक्ट्रॉन पकड़ती है; तंत्र अधिक तनावग्रस्त से अधिक “सुव्यय” अवस्था में आता है।
    • निर्माण/उत्सर्जन: ऊर्जा-अंतर दहलीज़ पार करता है और पैकेट निकलता है।
    • चिह्न: तीखी रेखा-श्रृंखलाएँ—नीहारिकाओं/प्लाज़्मा की “नीऑन लाइट”।
  5. विनाश (उल्टे लपेटों का खुलना)
    • भंडार: स्थिर, विपरीत लपेटें मिलकर खुल जाती हैं।
    • निर्माण/उत्सर्जन: लगभग पूरा भंडार दो विपरीत-दिशी पैकेटों में बदलता है (संकीर्ण पट्टी, जोड़ी-दिशा), जैसे प्रसिद्ध 0.511 MeV
  6. चेरेंकोव (फेज़-वेलॉसिटी का शंकु)
    • भंडार: आवेश माध्यम की फेज़-गति से तेज़ भागता है।
    • निर्माण/उत्सर्जन: फेज़ शंकु के साथ “फटती” है; नीला प्रभा पैक होता है; कोण फेज़-गति से तय।
    • चैनल: पथ-दहलीज़ के लगातार पार बने रहने का विशेष मामला।
  7. अरेखीय व मिश्रण (कन्वर्ज़न, योग/अंतर, रामन)
    • भंडार: बाहरी प्रकाश-क्षेत्र ऊर्जा देते हैं; अरेखीयता उसे पुनर्वितरित करती है।
    • निर्माण/उत्सर्जन: फेज़-मिलान और चैनल-संरेखण पर नई आवृत्ति वाला पैकेट (उत्तेजित या स्वस्फूर्त) निकलता है; दिशाभाव/कोहेरेंस ज्यामिति और पदार्थ-तनाव पर निर्भर।

तीन “बाह्य रूप” कैसे बनते हैं: रेखा-चौड़ाई, दिशाभाव, कोहेरेंस


हर व्यतिक्षेप दूर तक “प्रकाश” नहीं बनता: पथ-दहलीज़ छाँटती है


स्थापित सिद्धान्तों से सामंजस्य


संक्षेप में


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श्रेय (सुझाव): लेखक: 屠广林|कृति: “ऊर्जा फिलामेंट सिद्धांत”|स्रोत: energyfilament.org|लाइसेंस: CC BY 4.0
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संस्करण जानकारी: प्रथम प्रकाशन: 2025-11-11 | वर्तमान संस्करण: v6.0+5.05