सूचीअध्याय 6: क्वांटम क्षेत्र (V5.05)

I. घटनाएँ और मुख्य प्रश्न

जब दो तटस्थ, विद्युत पृथक धातु प्लेटें नैनो–माइक्रो पैमाने तक पास आती हैं, तो वे एक-दूसरे की ओर खिंचती हैं। बल 1/r² जैसी सहज धारणा से कहीं तेज़ बढ़ता है। विभिन्न ज्यामितियों (प्लेट–प्लेट, गोला–प्लेट) और पदार्थों में यह प्रभाव दिखता है; कुछ द्रव माध्यमों में बल का चिह्न उलटकर प्रतिकर्षण भी बन सकता है। यदि सीमा को बहुत तेज़ी से “झटका” दें या उसका प्रभावी स्थान बदलें, तो “वैक्यूम” से फोटॉन युग्म निकलते हैं—गतिशील रूप। बिना आवेश और बाहरी क्षेत्र के बल कहाँ से आता है, और ज्यामिति/पदार्थ/माध्यम/तापमान इसके मान और चिह्न को क्यों बदलते हैं?


II. ऊर्जा तंतु सिद्धान्त (EFT) के अनुसार: सीमा “सागर” का स्पेक्ट्रम बदलती है, इसलिए दबाव-अंतर पैदा होता है

ऊर्जा तंतु सिद्धान्त (EFT) में “वैक्यूम” ऊर्जा सागर (Energy Sea) की आधार अवस्था है, जिसमें अत्यन्त क्षीण तनन पृष्ठभूमि-शोर (TBN) व्याप्त रहता है। यह शोर बहुत-सी आवृत्तियों और दिशाओं पर सूक्ष्म तरंगों/क्रीज़ों के रूप में दिखता है। धातु या डायइलेक्ट्रिक सीमाएँ अनुमत तरंगों का चयन करती हैं—मानो बाधित अनुनादी गुहा। इसके तीन प्रमुख परिणाम:

  1. स्पेक्ट्रम: भीतर विरल, बाहर समृद्ध
    • प्लेटों के बीच केवल “मेल खाती” तरंगें समा पाती हैं; अनेक संभावित उतार-चढ़ाव हट जाते हैं।
    • बाहर ज्यामितीय छलनी ढीली है; उपलब्ध मोड अधिक हैं।
    • अतः बाहर “अधिक शोर”, भीतर “अधिक शांति” का वातावरण बनता है।
  2. तनन-दबाव का अंतर
    • पृष्ठभूमि तरंगें सर्वदिश छोटे-छोटे धक्कों जैसी हैं; बाहर समृद्ध स्पेक्ट्रम से शुद्ध धक्का थोड़ा अधिक बनता है।
    • यह स्पेक्ट्रल असमानता दबाव-अंतर में बदलती है और प्लेटों को पास धकेलती है।
    • कुछ पदार्थ–माध्यम युग्मों में भीतरी चयन हावी हो सकता है; चिह्न पलट कर प्रतिकर्षण मिल सकता है।
  3. सीमा का तीव्र पुनर्लेखन: पृष्ठभूमि “पंप” होती है और युग्म उत्सर्जित होते हैं
    • सीमा को तीव्रता से हिलाने या उसकी विद्युतचुम्बकीय विशेषताओं को शीघ्र बदलने पर (जैसे सुपरकंडक्टिंग परिपथों में) उपलब्ध स्पेक्ट्रम कम समय में पुनर्व्यवस्थित होता है। तनन पृष्ठभूमि-शोर (TBN) “पंप” होकर सहसम्बद्ध फोटॉन-युग्म निकालता है।
    • ऊर्जा संरक्षण बना रहता है: फोटॉनों की ऊर्जा सीमा को बदलने में किए गए कार्य से आती है।

एक पंक्ति: सीमा स्पेक्ट्रम बदलती है → स्पेक्ट्रम असममित होता है → तनन-दबाव का अंतर पैदा होता है। बल की दिशा और तीव्रता इस पर निर्भर है कि स्पेक्ट्रम कैसे बदला गया।


III. प्रतिनिधि विन्यास (प्रयोगशाला में जो दिखता है)


IV. प्रायोगिक हस्ताक्षर (पहचान कैसे करें)


V. सामान्य भ्रांतियों के संक्षिप्त उत्तर


VI. मानक वर्णन से मेल (भौतिकी वही, रूपक अलग)


VII. संक्षेप में

कैसिमिर प्रभाव कोई रहस्यमय बल नहीं है। सीमाएँ ऊर्जा सागर का स्पेक्ट्रम बदलती हैं, जिससे दोनों ओर की पृष्ठभूमि-तनन की तीव्रता व अभिमुखियाँ अलग हो जाती हैं और दबाव-अंतर बनता है। स्थिर दशा में यह निकट-क्षेत्र आकर्षण (या चुने हुए माध्यमों में प्रतिकर्षण) देता है; गतिशील दशा में स्पेक्ट्रम-परिवर्तन पृष्ठभूमि को सहसम्बद्ध फोटॉन-पैकेटों में “पंप” कर देता है।
याद रहे: सीमा स्पेक्ट्रम तय करती है, स्पेक्ट्रम दबाव तय करता है, और दबाव ही बल बनता है।


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श्रेय (सुझाव): लेखक: 屠广林|कृति: “ऊर्जा फिलामेंट सिद्धांत”|स्रोत: energyfilament.org|लाइसेंस: CC BY 4.0
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संस्करण जानकारी: प्रथम प्रकाशन: 2025-11-11 | वर्तमान संस्करण: v6.0+5.05