सूचीअध्याय 6: क्वांटम क्षेत्र (V5.05)

I. घटनाएँ और उनसे उठते प्रश्न

जब बोसॉनिक कणों के समूह को अत्यन्त ठंडा किया जाता है, तो वे अलग-अलग नहीं चलते; वे एक ही क्वांटम अवस्था में आकर चरण-संगत “कालीन” की तरह साथ-साथ डोलते हैं। प्रयोग से मिलने वाले संकेतों में शामिल हैं: दो स्वतंत्र संघननों को साथ छोड़ा जाए तो तीक्ष्ण व्यतिकरण धारियाँ बनती हैं; वलयाकार पात्र में द्रव बिना रोध के लम्बे समय तक बहता है; हल्के हिलाने पर श्यानता लगभग शून्य रहती है, पर एक दहलीज पार करते ही क्वांटमित भंवर अचानक उभरते हैं। मूल प्रश्न हैं—इतना ठंडा द्रव लगभग घर्षणरहित क्यों बहता है; वेग मनचाहा क्यों नहीं बल्कि क्वांटमित सीढ़ियों में क्यों आता है; और “सामान्य” तथा “सुपरद्रव” दोनों घटक साथ-साथ क्यों मिलते हैं।


II. ऊर्जा तंतु सिद्धान्त (EFT) की दृष्टि: चरण-लॉकिंग, मार्ग-बन्दी और क्वांटमित दोष

ऊर्जा तंतु सिद्धान्त (EFT) में स्थिर संरचनाएँ—जैसे परमाणु या युग्मित इलेक्ट्रॉन—तंतुओं के लपेट से बनती हैं; बाहरी परत ऊर्जा सागर (Energy Sea) से जुड़ती है और भीतर अपना ताल बनाए रखती है। कुल स्पिन यदि पूर्णांक है, तो सामूहिक गति बोसॉन नियमों का पालन करती है और चरण मिलकर कोहेरेंट जोड़ते हैं। पर्याप्त ठंडा करने पर तीन बातें निर्णायक होती हैं—

संकल्पना-सीमा: EFT में गेज बोसॉन (फोटॉन, ग्लूऑन) ऊर्जा सागर में चलते तरंग-पैकेट हैं, जबकि परमाणु संघनन स्थिर लपेट संरचनाओं की चरण-लॉकिंग है। दोनों बोसॉनिक हैं, पर “सामग्री” अलग है—क्षेत्र-लहर की लहरियाँ बनाम बाहरी परत के सामूहिक स्वतंत्रताएँ।


III. प्रतिनिधि परिदृश्य: हीलियम से ठंडे परमाणु तक


IV. प्रेक्षणीय हस्ताक्षर


V. मानक वर्णन से साम्य

मानक भाषा में चरण-कालीन को मैक्रोस्कोपिक वेव-फंक्शन (ऑर्डर पैरामीटर) से लिखा जाता है; वेग चरण-ग्रेडिएंट से तय होता है और धीमी गति पर ऊर्जा-वहनकर्ता उत्तेजित नहीं होते, इसलिए अपव्यय नहीं होता। महत्वपूर्ण वेग इस पर टिका है कि भंवर और फॉनॉन उत्पन्न हो पाते हैं या नहीं। EFT दृष्टि अधिक “सामग्री-जनित” चित्र देती है: तनन पृष्ठभूमि-शोर (TBN) दबते ही बाहरी परतों की चरण-लॉकिंग से साझा जाल बनता है; कम प्रेरण पर रिसाव-मार्ग बन्द रहते हैं; अधिक प्रेरण पर वे क्वांटमित दोषों के रूप में खुलते हैं। दोनों वर्णन प्रेक्षण व स्केल-कानूनों पर सहमत हैं, बस जोर अलग है—ज्यामिति-तरंग बनाम तंतु-और-सागर।


VI. संक्षेप में

बोस–आइंस्टीन संघनन और सुपरद्रवता “चरम शीत का रहस्य” नहीं; यह चरण-लॉकिंग से बिछी बहु-स्तरीय कालीन का परिणाम है। यह कालीन प्रवाह को सबसे चिकने तनन-गलियारों में ले जाती है और छोटे प्रेरण पर अपव्यय-मार्ग बन्द रखती है; ज़्यादा बल पर वह क्वांटमित भंवरों से झुकती है और अपव्यय शुरू होता है।
एक पंक्ति: चरण-लॉकिंग कालीन बिछाती है और मार्ग बन्द करती है; प्रबल प्रेरण दोष जनाता है और अपव्यय शुरू होता है।


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श्रेय (सुझाव): लेखक: 屠广林|कृति: “ऊर्जा फिलामेंट सिद्धांत”|स्रोत: energyfilament.org|लाइसेंस: CC BY 4.0
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संस्करण जानकारी: प्रथम प्रकाशन: 2025-11-11 | वर्तमान संस्करण: v6.0+5.05