सूची / अध्याय 6: क्वांटम क्षेत्र (V5.05)
ऊर्जा तंतु सिद्धांत (EFT) में हर मापन तीन क्रमिक चरणों से बनता है—युग्मन, समापन, और स्मृति। इन्हीं से तय होता है कि व्यतिकरण की पट्टियाँ बनी रहें, फीकी पड़ें या पूरी तरह लुप्त हों।
I. द्वि–विवर विन्यास क्या दिखाता है
- विन्यास: स्रोत को इतना कम किया जाता है कि एक बार में केवल एक इकाई निकले। आगे दो संकीर्ण विवरों वाली प्लेट रहती है और पीछे एक स्क्रीन जो एक–एक आगमन दर्ज करती है। आवश्यकता हो तो विवरों पर या उसके बाद सोंडा/ऑप्टिकल तत्व जोड़ते हैं।
- स्थिति 1: पथ न पढ़ना। दोनों विवर खुले रहते हैं और रास्तों को अलग करने वाला कोई यंत्र नहीं होता। बिंदु एक–एक कर जमा होते हैं और कुछ ही देर में उजली–गहरी पट्टियाँ उभर आती हैं। हर आगमन एक बिंदु है; दीर्घकालीन प्रतिरूप पट्टियाँ हैं।
- स्थिति 2: “कौन–सा विवर” पढ़ना। विभिन्न ध्रुवणों, फेज़ टैगों या पर्याप्त संवेदनशील सोंडा से रास्ते अलग करते हैं। पट्टियाँ गायब हो जाती हैं और स्क्रीन पर दो चौड़े शिखर मिलते हैं। आगमन बिंदुवार ही रहते हैं, पर सांख्यिकी बदल जाती है।
- स्थिति 3: पथ का कमजोर पठन। बहुत कमजोर सोंडा या सूक्ष्म, हटाने योग्य चिन्ह लगाया जाता है। पट्टियाँ बनी रहती हैं पर उनका कंट्रास्ट घटता है; युग्मन जितना अधिक, फीका पड़ना उतना अधिक।
बदला केवल पथ–क्षेत्र गया है। स्रोत और स्क्रीन समान हैं; बदलता है तो बस व्यतिकरण–आधार का होना और उसकी धार।
II. EFT की मूल व्याख्या: युग्मन → समापन → स्मृति
- युग्मन: तनाव–प्राकृतिक दृश्य को फिर लिखना। प्रकाश तनाव (Tension) की विघ्न–लहरों का पैकेट है जो ऊर्जा समुद्र (Energy Sea, EFT) में चलता है। दो विवर एक मार्ग–मानचित्र (Path) उकेरते हैं—जहाँ स्थानीय रिले सुगम है और जहाँ बाधित। सोंडा जोड़ने से एक नई संरचना क्षेत्र से युग्मित होती है, जो दोनों मार्गों के “एक–चरण” संबंध को आंशिक या पूर्णतः बिगाड़ देती है। पुनर्लेखन जितना मजबूत, व्यतिकरण–आधार उतना सपाट। स्थानिक परिवर्तन को तनाव–ढाल (Tension Gradient) कहते हैं।
- समापन: एक घटना को किसी बिंदु पर बाँधना। जब पैकेट किसी स्थानीय तत्व से प्रभावी ऊर्जा–विनिमय करता है और समापन–सीमा पार करता है, घटना विशिष्ट स्थान–समय पर “लॉक” हो जाती है। तब वैकल्पिक मार्ग से व्यतिकरण संभव नहीं रहता। समापन पथ पर भी हो सकता है, स्क्रीन पर भी—यह युग्मन की ताकत और ज्यामिति पर निर्भर है।
- स्मृति: चयन को पढ़े जाने योग्य परिणाम में बढ़ाना। समापन सूक्ष्म–स्तरीय है। उसे पढ़ने लायक बनाने के लिए यंत्र को उसे बढ़ाना और स्मृति में लिखना पड़ता है—जैसे सूई का डिफ्लेक्शन, पिक्सेल–फ्लिप, या आवेश–संचय। स्मृति लिखते ही प्रक्रिया अपरिवर्तनीय हो जाती है; खोई हुई पट्टियाँ लौटती नहीं।
तीनों स्थितियों पर लौटें: पथ न पढ़ने पर युग्मन अति–कम है, समापन स्क्रीन पर होता है और पट्टियाँ तीखी दिखती हैं। “कौन–सा विवर” पढ़ने पर समापन विवरों पर ही हो जाता है, मानचित्र फिर लिखा जाता है और दूर व्यतिकरण नहीं बनता। कमजोर पठन में पुनर्लेखन आंशिक है और कंट्रास्ट घटता है।
III. विलंबित चयन, वही भाषा
- सार: दोनों मार्ग समानांतर चलने दिए जाते हैं और अंतिम क्षण में तय करते हैं—उन्हें संयोजित कर व्यतिकरण पढ़ें या अलग–अलग कर पथ पढ़ें। माख–ज़ेहंदर इंटरफेरोमीटर में यह अंतिम भाग में दूसरे बीम–स्प्लिटर को लगाना/हटाना है। खगोलीय परिदृश्य में दो लंबी गुरुत्वीय–लेंस–राहें लेकर दूरबीन पर छवि या व्यतिकरण–निकास चुनते हैं।
- घटना: दूसरा स्प्लिटर लगाने पर उजला आउटपुट और अंधा पोर्ट बनता है। हटाने पर दोनों आउटपुट अपने–अपने पथ की सांख्यिकी देते हैं। निर्णय को स्क्रीन से ठीक पहले तक टाला जा सकता है; परिणाम फिर भी उसी अंतिम चयन का पालन करते हैं।
- व्याख्या: टलता समापन का ढंग है, अतीत में संदेश नहीं। जब तक बीच–राह में कोई प्रबल युग्मन चरण–साम्य नहीं तोड़ता, क्षेत्र व्यतिकरण–क्षम बना रहता है। स्प्लिटर लगाना/हटाना समापन से पहले अंतिम सीमा–शर्त तय करता है—यदि व्यतिकरण–समापन चुनेंगे तो रास्ते मिलेंगे और मानचित्र उजले–गहरे देगा; यदि पथ–समापन चुनेंगे तो दोनों बाँहें अलग–अलग बंद होंगी और स्मृति लिखेंगी। प्रतिगामी कार्य–कारण की आवश्यकता नहीं।
IV. क्वांटम इरेज़र: फिर भी युग्मन → समापन → स्मृति
- सार: पहले दोनों पथों पर हल्का चिन्ह (जैसे भिन्न ध्रुवण) लगाते हैं। फिर निकट–अंत में ऐसा यंत्र जोड़ते हैं जो चिन्ह मिटाए या दोनों को एक ही उन्मुखीकरण में घुमा दे। कcoincedence–काउंटिंग से वही उप–नमूने चुनते हैं जिनमें इरेज़र सचमुच हुआ।
- घटना: यदि चिन्ह पहले ही स्मृति में बढ़ चुका है तो पट्टियाँ वापस नहीं आतीं। यदि चिन्ह केवल संभावित रहा और समापन से पहले पूर्णतः मिटा दिया गया तो शर्तीय सांख्यिकी में पट्टियाँ फिर दिखती हैं। अधूरा इरेज़र आंशिक वापसी देता है।
- व्याख्या: चिन्ह लगाना मार्ग–मानचित्र को बदल देता है। यदि समापन से पहले चरण–साम्य पुनर्स्थापित हो और बीच–राह में स्मृति न लिखी जाए, तो निकास पर व्यतिकरण–आधार फिर बनता है; इसलिए उपयुक्त उप–नमूने में पट्टियाँ लौटती हैं। यदि स्मृति लिखी जा चुकी है, प्रक्रिया अपरिवर्तनीय रहती है और इरेज़र निष्फल।
V. प्रायः होने वाली गलतफहमियाँ—संक्षेप में
- मापन केवल देखना नहीं है; यह एक युग्मन जोड़ता है जो मानचित्र को बदलता है और समापन को पहले ला सकता है।
- “कॉलेप्स” कोई रहस्यमय पल नहीं; यह युग्मन–समापन–स्मृति की मैक्रो–छवि है।
- विलंबित चयन अतीत नहीं बदलता; वह समापन से पहले अंतिम सीमा–शर्त तय करता है।
- क्वांटम इरेज़र जादू नहीं; वह चिन्ह हटाता है, चरण–साम्य लौटाता है और रास्ते में स्मृति–लेखन से बचता है।
VI. संक्षेप में (चार पंक्तियाँ)
- पट्टियाँ पहले से उकेरे मार्ग–मानचित्र से आती हैं; बिंदुवार घटनाएँ समापन–सीमा और स्मृति–लेखन से बनती हैं।
- मापन = युग्मन, समापन, स्मृति; युग्मन जितना प्रबल, व्यतिकरण–आधार उतना समतल और पट्टियाँ उतनी मंद।
- विलंबित चयन समापन–विधि चुनता है, समय–उलट नहीं।
- क्वांटम इरेज़र पट्टियाँ तभी लौटाता है जब स्मृति न लिखी गई हो और इरेज़र पूरा हो।
परिशिष्ट — कमजोर मापनों का परिवार (EFT मार्गदर्शिका)
- कमजोर मापन: युग्मन और ऊर्जा–विनिमय छोटे; चरण–साम्य हल्का बाधित, मानचित्र आंशिक रूप से बदला, कंट्रास्ट घटा पर बना रहता है।
- सतत कमजोर मापन: छोटे–छोटे युग्मनों का संचय; डिकोहेरेंस कदम–दर–कदम बढ़ती है और पट्टियाँ धुंधली होती जाती हैं।
- क्वांटम इरेज़र: पहले चिन्ह लगाएँ, समापन से पहले मिटाएँ, और कहीं भी मैक्रो–स्मृति न लिखें; पूर्ण इरेज़र और उचित चयन पर पट्टियाँ लौटती हैं।
- विलंबित चयन: समापन–विधि का चुनाव अंत तक टालें—व्यतिकरण या पथ—बिना प्रतिगामी कारणता के, केवल अंतिम सीमा–शर्त के साथ।
- संरक्षित मापन और “कमजोर मान”: प्रबल संरक्षण में लगभग शून्य विनिमय के साथ पढ़ना; मानचित्र लगभग अपरिवर्तित रहता है, जबकि स्थानीय फेज़/वितरण निकालते हैं, और समापन पढ़ने के बाद तक टल जाता है।
- परस्पर–क्रिया–रहित मापन: सीमा–शर्त बदलकर एक बाँह रोकें ताकि दूसरी निकासी की संभावनाएँ बदलें; भले सीधा ऊर्जा–विनिमय न हो, मानचित्र बदल चुका होता है और सांख्यिकी वस्तु की उपस्थिति बताती है।
- पथ–पठनीयता बनाम पट्टी–दृश्यता: पथ–चिन्ह जितने साफ, चरण–साम्य उतना कम और आधार उतना दबा; चिन्ह जितने धुंधले, आधार उतना सशक्त।
कॉपीराइट और लाइसेंस: जब तक अलग से न बताया जाए, “ऊर्जा फिलामेंट सिद्धांत” (पाठ, चार्ट, चित्र, प्रतीक और सूत्र सहित) का कॉपीराइट लेखक (屠广林) के पास है।
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श्रेय (सुझाव): लेखक: 屠广林|कृति: “ऊर्जा फिलामेंट सिद्धांत”|स्रोत: energyfilament.org|लाइसेंस: CC BY 4.0
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संस्करण जानकारी: प्रथम प्रकाशन: 2025-11-11 | वर्तमान संस्करण: v6.0+5.05